डेडियापाड़ा विधायक चेतर वसावा की सजा रद्द करने की मांग,भारत आदिवासी पार्टी ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
03 Jul 2026
रिपोर्टर-- रवि कुमरे
इंदौर। गुजरात के डेडियापाड़ा से विधायक चेतर भाई वसावा को सुनाई गई सात वर्ष की सजा के विरोध में भारत आदिवासी पार्टी (BAP) ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर सजा रद्द करने की मांग उठाई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की आवाज बुलंद करने वाले आदिवासी नेता को राजनीतिक षड्यंत्र के तहत दंडित किया गया है। साथ ही अनुसूचित क्षेत्रों में लागू वन कानूनों की व्यापक समीक्षा और आदिवासी अधिकारों के प्रभावी संरक्षण की भी मांग की गई है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि 30 अक्टूबर 2023 को डेडियापाड़ा क्षेत्र में वन भूमि से जुड़े विवाद के बाद विधायक चेतर भाई वसावा, उनकी पत्नी शकुंतला वसावा सहित नौ लोगों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया था। इसके बाद 23 जून 2026 को न्यायालय ने सभी आरोपियों को सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। भारत आदिवासी पार्टी का कहना है कि यह कार्रवाई वन विभाग द्वारा कथित रूप से गलत तथ्यों और राजनीतिक दबाव के आधार पर की गई।
पार्टी ने राष्ट्रपति से संविधान के अनुच्छेद-72 के तहत अपने विशेषाधिकारों का उपयोग करते हुए चेतर वसावा की सजा माफ अथवा निरस्त करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही संविधान की पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में लागू भारतीय वन अधिनियम-1927, वन (संरक्षण) अधिनियम-1980 तथा वन अधिकार अधिनियम-2006 के क्रियान्वयन और वैधता की व्यापक समीक्षा कराने की मांग भी की गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं के संवैधानिक अधिकारों, पेसा अधिनियम-1996 तथा वन अधिकार अधिनियम-2006 के प्रावधानों का समुचित पालन नहीं होने से आदिवासी समुदाय के पारंपरिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। पार्टी ने मांग की है कि यदि प्रारंभिक प्रशासनिक कार्रवाई का विधिक आधार संदिग्ध पाया जाता है तो पूरे मामले की निष्पक्ष कानूनी समीक्षा कराई जाए तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की अनुशंसाओं के अनुरूप जनजातीय सलाहकार परिषद (TAC) से परामर्श लेकर वन कानूनों का न्यायसंगत और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
भारत आदिवासी पार्टी के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष कोमल धोपिया ने कहा कि राष्ट्रपति से आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, न्याय व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने तथा अनुसूचित क्षेत्रों में कानूनों के निष्पक्ष क्रियान्वयन के लिए आवश्यक हस्तक्षेप का अनुरोध किया गया है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष कोमल धोपिया, संभागीय महिला अध्यक्ष रजनी पिंडारे, प्रदेश सदस्य जितेंद्र मुनिया, जिला सदस्य राधेश्याम गोहे सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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