नर्मदापुरम संभाग की टीम ने पश्चिम बंगाल में दो दिवसीय अखिल भारतवर्षीय गोंड महासभा द्वारा आयोजित वीरांगना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस पर सांस्कृतिक प्रस्तुति किया
30 Jun 2026

नर्मदापुरम संभाग की टीम ने पश्चिम बंगाल में दो दिवसीय अखिल भारतवर्षीय गोंड महासभा द्वारा आयोजित वीरांगना रानी दुर्गावती बलिदान दिवस पर सांस्कृतिक प्रस्तुति किया
श्यामनगर/ पश्चिम बंगाल - में वीरांगना रानी दुर्गावती जी का दो दिवसीय अखिल भारतवर्षीय गोंड महासभा ने शहादत दिवस आदिवासी सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोगों, युवाओं एवं महिलाओं ने भाग लेकर वीरांगना रानी दुर्गावती के अदम्य साहस और बलिदान को नमन किया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश से राज रावन परते एवं साधना उइके के नेतृत्व में आई टीम ने आकर्षक आदिवासी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। पारंपरिक नृत्य, गीत और वाद्ययंत्रों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया तथा आदिवासी संस्कृति और परंपरा की समृद्ध विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए साधना उइके ने कहा कि "वीरांगना रानी दुर्गावती केवल इतिहास की महान योद्धा ही नहीं, बल्कि नारी शक्ति, स्वाभिमान, साहस और मातृभूमि की रक्षा का अमर प्रतीक हैं। हमें उनके संघर्ष, त्याग और वीरता से प्रेरणा लेकर अपनी संस्कृति, समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए सदैव जागरूक रहना चाहिए।" छत्तीसगढ़ से आए केपी प्रधान दादा ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को अपनी जड़ों, संस्कृति और गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने युवाओं से अपने महापुरुषों के आदर्शों पर चलने तथा आदिवासी संस्कृति, भाषा और परंपराओं के संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। राधेश्याम काकोड़िया ने कहा कि गोंडी कोयापुनेम किसी एक धार्मिक ग्रंथ पर आधारित नहीं है, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही गोंड समुदाय की परंपराओं, मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित जीवन-पद्धति है। कार्यक्रम का समापन वीरांगना रानी दुर्गावती जी को सामूहिक श्रद्धांजलि अर्पित करने तथा समाज की एकता, संस्कृति और स्वाभिमान को सशक्त बनाने के संकल्प के साथ हुआ। आयोजन में उपस्थित सच्चिदानंद गोंड, मैनेजर साह और मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उड़ीसा, दिल्ली, उत्तरप्रदेश और अन्य राज्यों से आए लोगों ने रानी दुर्गावती के बलिदान को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। मध्य प्रदेश से सांस्कृतिक कार्यक्रम में मुख्य रूप से आकाश कुमरे , गुंजन उईके ,रामकिशोर माही मर्सकोले, चांदनी वट्टी, मनीषा उईके, प्रिया ठाकुर । माध्यम से कोलकाता में मध्यप्रदेश की ट्राइबल (आदिवासी)संस्कृति को प्रस्तुत किया।
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