शाहाबाद में 'इंटरनेशनल' के नाम पर शिक्षा का काला कारोबार? अभिभावकों और कानून के निशाने पर निजी स्कूल
20 Apr 2026

शाहाबाद में 'इंटरनेशनल' के नाम पर शिक्षा का काला कारोबार? अभिभावकों और कानून के निशाने पर निजी स्कूल
शाहाबाद में 'इंटरनेशनल' के नाम पर शिक्षा का काला कारोबार? अभिभावकों और कानून के निशाने पर निजी स्कूल शाहाबाद, हरदोई। नगर में 'इंटरनेशनल' शब्द का बोर्ड लगाकर शिक्षा की दुकान सजाने वाले कई निजी स्कूल अब संदेह के घेरे में हैं। चमकदार इमारतों और बड़े दावों के पीछे छिपे मनमानी फीस और अवैध वसूली के खेल ने मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर तोड़ दी है। विशेषकर कैरियर इंटरनेशनल इंटर कॉलेज जैसे संस्थानों को लेकर नगर में चर्चाएं गर्म हैं कि यहाँ असलियत छिपाकर शिक्षा के नाम पर केवल व्यापार किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन संस्थानों की असलियत इनके मान्यता के दस्तावेजों में कुछ और है और विज्ञापनों में कुछ और।सूत्रों के अनुसार, जिस स्कूल की मान्यता 'कैरियर पब्लिक स्कूल' के नाम से है, उसे 'इंटरनेशनल' का भारी-भरकम नाम देकर अभिभावकों को खुलेआम गुमराह किया जा रहा है। तकनीकी रूप से 'इंटरनेशनल स्कूल' का अर्थ उन संस्थानों से होता है जो आईबी या कैम्ब्रिज जैसे अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम अपनाते हैं, लेकिन शाहाबाद में मात्र फर्जी नाम का सहारा लेकर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। इस पूरे प्रकरण में स्थानीय शिक्षा विभाग की भूमिका भी संदिग्ध नजर आती है क्योंकि यू-डाइस कोड 09252300505 पर पंजीकृत विद्यालय का वास्तविक नाम 'कैरियर पब्लिक स्कूल, मोहल्ला चौक' दर्ज है, जबकि धरातल पर संचालन 'कैरियर इंटरनेशनल कॉलेज' के नाम से किया जा रहा है। इस बड़े 'फर्जीफिकेशन' पर शिक्षा विभाग क्या कार्रवाई करेगा, यह अब बड़ी जांच का विषय बन गया है।अभिभावकों का यह भी आरोप है कि ये संस्थान एक सोची-समझी रणनीति के तहत किताबों और ड्रेस का 'सिंडिकेट' चला रहे हैं। नियमों को ताक पर रखकर परिवारों को मजबूर किया जाता है कि वे स्कूल द्वारा निर्धारित विशेष बुक स्टोर से ही महंगी सामग्री खरीदें। जो सामान बाजार में सामान्य दामों पर उपलब्ध हो सकता है, उसे स्कूल की ब्रांडिंग का ठप्पा लगाकर दो से तीन गुना ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। यह न केवल आर्थिक शोषण है, बल्कि शिक्षा के नाम पर की जा रही खुली लूट है। सबसे गंभीर विषय इन संस्थानों की मान्यता और प्रमाणपत्रों का है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि कुछ स्कूल कक्षा 11 और 12 की वैध मान्यता न होने के बावजूद छात्रों का प्रवेश ले रहे हैं और पिछले दरवाजे से अन्य बोर्डों के जरिए प्रमाणपत्र दिलाने का कथित खेल कर रहे हैं। बिना वैध मान्यता के कक्षाएं संचालित करना या भ्रामक नाम का उपयोग करना सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। कानूनविदों के अनुसार यह भारतीय न्याय संहिता की धारा 420 और धारा 468 के तहत दंडनीय अपराध है।शाहाबाद में शिक्षा विभाग की नाक के नीचे चल रहे इस गोरखधंधे पर अभी तक प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। अभिभावकों ने पुरजोर मांग की है कि शिक्षा विभाग तत्काल सभी निजी स्कूलों की वास्तविक मान्यता सूची और उनके आधिकारिक कॉलेज कोड सार्वजनिक करे। साथ ही, विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या 'कैरियर पब्लिक स्कूल' को 'इंटरनेशनल' नाम से प्रचार करने की कोई विभागीय अनुमति दी गई है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इन 'इंटरनेशनल' बोर्डों के पीछे छिपे सच को खंगालने की हिम्मत जुटा पाता है या शोषण का यह सिलसिला यूँ ही जारी रहेगा।