जिला अधिकारी पर प्रभावी बेसिक शिक्षा अधिकारी*? *सत्ता में बैठे विरादरी के विधायकों का संरक्षण प्राप्त करना पड़ रहा भारी* ?
11 Apr 2026

जिला अधिकारी पर प्रभावी बेसिक शिक्षा अधिकारी*? 
*सत्ता में बैठे विरादरी के विधायकों का संरक्षण प्राप्त करना पड़ रहा भारी* ?
*जिला अधिकारी पर प्रभावी बेसिक शिक्षा अधिकारी*? *सत्ता में बैठे विरादरी के विधायकों का संरक्षण प्राप्त करना पड़ रहा भारी* ? *हरदोई बीएसए पर ‘टेढ़ी’ नजर, मगर कार्रवाई शून्य* *डीएम की संस्तुति बेअसर, शासन की सख्ती सिर्फ कागज़ों में!* हरदोई। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजीत सिंह पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोपों का पहाड़ खड़ा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि *कार्रवाई का पहिया अब भी जाम पड़ा है*। शासन ने अनुशासनिक जांच के आदेश तो जारी कर दिए, मगर ज़मीनी स्तर पर *न तबादला, न निलंबन—सब कुछ सिर्फ कागज़ी खानापूर्ति* बनकर रह गया है। सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि *जिलाधिकारी हरदोई खुद बीएसए को पद से हटाने की स्पष्ट संस्तुति शासन को भेज चुके हैं*। इसके बावजूद कोई ठोस कदम न उठाया जाना पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। *डीएम की रिपोर्ट भी बेअसर!* सूत्र बताते हैं कि डीएम की रिपोर्ट में बीएसए की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए गए थे। इसके बावजूद कार्रवाई का न होना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं “ऊपर” से मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। *रसूख की ढाल में सुरक्षित* जनपद के शिक्षा विभाग से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक चर्चा गर्म है कि क्या किसी प्रभावशाली संरक्षण के चलते कार्रवाई की रफ्तार जानबूझकर रोकी जा रही है? अगर नहीं, तो फिर इतने गंभीर आरोपों के बावजूद सख्ती क्यों नहीं? *भ्रष्टाचार के संगीन आरोप* डॉ. अजीत सिंह पर लगे आरोप मामूली नहीं, बल्कि सीधे-सीधे सिस्टम को कठघरे में खड़ा करते हैं— *रिश्वतखोरी का आरोप*: ईसीसीई एजुकेटर भर्ती में 3 लाख रुपये सीधे निजी खाते में लेने की बात सामने। *शिक्षक भर्ती में खेल*: 29,000 शिक्षक भर्ती के तहत *स्कूल आवंटन के नाम पर प्रति अभ्यर्थी 50 हजार रुपये की मांग।* रुपए न देने पर 15 अभ्यर्थियों के अभिलेखों में गड़बड़ी दिखाकर अभी तक उनको नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया, जबकि कुछेक तो आंशिक त्रुटियों को सही भी करा चुके है। *लापरवाह खंड शिक्षा अधिकारियों की कार्यशैली हावी* सूत्रों के अनुसार - लापरवाह खंड शिक्षा अधिकारियों के कार्यों को ताक में रखकर बीएसए सीधे अपने ही कार्यालय के कार्मिकों का जबरिया वेतन रोक कर नोटिस जारी करते है, जबकि कार्यालय कार्मिकों, खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से शासन की मंशानुरूप कार्य कराने का अनुरोध करते है और कार्य न होने पर बीएसए को बता कर संबंधित के खिलाफ कार्यवाही, कराने का प्रयास करते हैं। लेकिन खंड शिक्षा अधिकारियों से मोटी रकम लेकर बीएसए द्वारा उन पर कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की जाती है। बी एस ए की इस कार्यशैली से सीधे कार्मिकों पर दवाब और मानसिक प्रताड़ना के चलते कार्य करने में असहजता महसूस होगी। *जेम पोर्टल में धांधली: नियमों को ताक पर रखकर खरीद*" *प्रक्रिया में गड़बड़ी, वित्तीय अनुशासन की खुली धज्जियां*। *अवैध अटैचमेंट: शासनादेश की अनदेखी कर शिक्षकों को कार्यालयों में जोड़ना*। *जांच या समय काटने की रणनीति?* अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश पर संयुक्त शिक्षा निदेशक (लखनऊ मंडल) को जांच सौंपी गई है। लेकिन सवाल वही—क्या यह जांच निष्पक्ष कार्रवाई की ओर बढ़ेगी या सिर्फ समय काटने का जरिया बनकर रह जाएगी? *अब फैसला—कार्रवाई या लीपापोती*? जब डीएम स्तर से कार्रवाई की संस्तुति हो चुकी है, तब केवल जांच आदेश जारी कर मामले को लटकाना साफ संकेत देता है कि सिस्टम में कहीं न कहीं गंभीर खामी है। *अब देखना यह है कि शासन वास्तव में सख्त कदम उठाता है या फिर भ्रष्टाचार के इन आरोपों पर हमेशा की तरह लीपापोती कर दी*