प्रश्न मीडिया से — क्या हिंदू को आत्मरक्षा का अधिकार नहीं?
09 Mar 2026
Reporter--Shantanu
छत्रपति शिवाजी सेना के युवा जिला अध्यक्ष शान्तनु रवा राजपूत ने मुजफ्फरनगर की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस प्रकार मीडिया का एक वर्ग इस घटना को प्रस्तुत कर रहा है, वह कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उन्होंने कहा कि यदि एक इमाम द्वारा पहले वार किया गया और उसके बाद एक हिंदू युवक ने प्रतिकार किया, तो क्या उस युवक को अपने प्राणों और सम्मान की रक्षा करने का अधिकार नहीं था? क्या भारत का संविधान केवल एक पक्ष को ही सुरक्षा का अधिकार देता है?
उन्होंने कहा कि क्या भारतीय संविधान ने प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार नहीं दिए? क्या कानून की दृष्टि में हर व्यक्ति समान नहीं है? यदि किसी व्यक्ति पर हमला होता है और वह अपनी रक्षा करता है, तो क्या उसे अपराधी की तरह प्रस्तुत करना न्यायसंगत है?
उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया को यह बताना चाहिए कि भारतीय कानून के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को निजी रक्षा का अधिकार प्राप्त है। कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि यदि किसी के जीवन, शरीर या संपत्ति पर तत्काल खतरा हो, तो वह अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रतिकार कर सकता है।
उन्होंने आगे प्रश्न उठाते हुए कहा—
क्या आत्मरक्षा करने वाला युवक ही दोषी है?
क्या मीडिया यह स्पष्ट करेगा कि पहले हमला किसने किया?
क्या पत्रकारिता का धर्म केवल भावनात्मक कथा बनाना है या सत्य को सामने लाना भी है?
क्या एक हिंदू युवक के जीवन और सुरक्षा का मूल्य कम है?
अंत में उन्होंने कहा कि यदि किसी नागरिक पर हमला होता है और वह अपनी रक्षा करता है, तो उसे अपराधी बनाना केवल न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध ही नहीं बल्कि संविधान की भावना के भी विपरीत है। मीडिया का दायित्व है कि वह पक्षपातपूर्ण कथानक गढ़ने के बजाय तथ्यों को सामने रखे और यह स्पष्ट करे कि इस देश में कानून सबके लिए समान है और आत्मरक्षा का अधिकार भी सभी नागरिकों को प्राप्त है।








