राष्ट्रीय पत्रकार सहायता संघ ने सूचना निदेशक से की अनुभवी पत्रकारों के चयन की मांग
08 Feb 2026

राष्ट्रीय पत्रकार सहायता संघ ने सूचना निदेशक से की अनुभवी पत्रकारों के चयन की मांग
एटा। देशभर के पत्रकारों एवं उनके परिवारों के हित में कार्य कर रहे राष्ट्रीय पत्रकार सहायता संघ ने उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय, लखनऊ के सूचना निदेशक को एक मांग पत्र भेजा है। संघ ने पत्र के माध्यम से प्रदेश के समस्त जनपदों में गठित की जाने वाली स्थायी पत्रकार समितियों एवं स्वास्थ्य सलाहकार समितियों में ऐसे अनुभवी और समर्पित पत्रकारों को शामिल किए जाने की मांग की है, जो वास्तव में पत्रकारों और उनके परिवारों के हितों की समझ रखते हों। इस संबंध में राष्ट्रीय पत्रकार सहायता संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती प्रसाद उर्फ बबलू चक्रवर्ती ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार एवं सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निर्देशानुसार प्रत्येक जिले में स्थायी पत्रकार समिति एवं स्वास्थ्य सलाहकार समिति का गठन किया जाता है। इन समितियों का उद्देश्य स्थानीय पत्रकारों और उनके परिवारों की समस्याओं एवं शिकायतों का समाधान करना, पत्रकारिता को स्वच्छ और सशक्त बनाना तथा शासन, प्रशासन और प्रेस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीते लंबे समय से कई जनपदों में समितियों का गठन मनमाने तरीके से किया जा रहा है, जिसमें अनुभवहीन और अनभिज्ञ पत्रकारों को शामिल कर लिया जाता है। ऐसे सदस्य न तो स्थानीय पत्रकारों की समस्याओं को समिति के समक्ष प्रभावी ढंग से रख पाते हैं और न ही सरकार की जनहितकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि पत्रकारों और उनके परिवारों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता और शासन-प्रशासन द्वारा किए जा रहे जनहितकारी कार्यों की सही जानकारी भी जनता तक नहीं पहुंच पाती। इससे पत्रकारिता का जोखिम बढ़ रहा है और पत्रकार विभिन्न प्रकार की प्रताड़नाओं का सामना कर रहे हैं। समस्याओं के समाधान के अभाव में पत्रकारों में भय का माहौल बन रहा है, जिससे स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी पत्रकारिता का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सूचना निदेशक से आग्रह किया है कि प्रदेश भर में गठित की जाने वाली जिला स्तरीय स्थायी पत्रकार समितियों एवं स्वास्थ्य सलाहकार समितियों में कम से कम दस वर्ष का अनुभव रखने वाले स्थानीय संपादकों एवं पत्रकारों को ही शामिल किया जाए, जो सेवा और समर्पण की भावना से पत्रकारों एवं उनके परिवारों के हित में कार्य कर रहे हों। इससे सरकार और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की पत्रकार-हितैषी सोच को वास्तविक रूप से साकार किया जा सकेगा।
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