विंध्य की गोद में बसा खिवनी अभ्यारण्य बना इको-टूरिज्म की नई पहचान
05 Feb 2026

विंध्य की गोद में बसा खिवनी अभ्यारण्य बना इको-टूरिज्म की नई पहचान
देवास। विंध्य पर्वत श्रृंखलाओं की गोद में स्थित खिवनी अभ्यारण्य तेजी से मध्यप्रदेश के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में अपनी पहचान बना रहा है। देवास और सीहोर जिले की सीमा पर फैला यह अभ्यारण्य लगभग 134 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में विस्तृत है, जहां घने जंगल, पर्वत घाटियां, नदी-नाले और समृद्ध जैव विविधता पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। खिवनी अभ्यारण्य बाघ, तेंदुआ, भालू, लकड़बग्घा, सोन कुत्ता जैसे मांसाहारी वन्यजीवों के साथ चीतल, सांभर, नीलगाय, चौसिंगा सहित अनेक शाकाहारी प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है। इसके अलावा यहां पक्षियों की लगभग 170 प्रजातियां और तितलियों की 65 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, जो इसे जैव विविधता की दृष्टि से समृद्ध बनाती हैं। वर्षाकाल में बहते झरने, हरियाली से ढकी पहाड़ियां और मनोरम दृश्य पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अभ्यारण्य में सर्वसुविधायुक्त टूरिस्ट कैंपस, कॉटेज, टेंट, वॉच टॉवर तथा जंगल सफारी की व्यवस्था की गई है। भोजन की सुविधा स्थानीय समिति के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है। कलेक्टर श्री ऋतुराज सिंह एवं डीएफओ देवास श्री अमित सिंह चौहान के मार्गदर्शन में खिवनी अभ्यारण्य को पर्यटन मानचित्र पर व्यापक स्तर पर स्थापित करने के लिए लगातार मॉनिटरिंग और व्यवस्थागत सुधार किए जा रहे हैं। ईको-टूरिज्म विकास बोर्ड के माध्यम से स्थानीय समुदाय को रोजगार से जोड़ा गया है। सफारी संचालन, आवास प्रबंधन, भोजन व्यवस्था और लघु उद्योगों के जरिए ग्रामीणों और युवाओं की आय में वृद्धि हो रही है, जिससे संरक्षण के साथ-साथ आजीविका को भी बढ़ावा मिल रहा है। भौगोलिक दृष्टि से यह अभ्यारण्य भोपाल और इंदौर के बीच स्थित है, जिससे यहां पहुंचना आसान है। समीपस्थ रेलवे स्टेशन हरदा तथा नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर और भोपाल हैं। पर्यटक mpforest.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग कर खिवनी अभ्यारण्य की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों का अनुभव ले सकते हैं। प्रकृति की शांति, वन्यजीवों की उपस्थिति और विंध्याचल की मनोरम छटा के कारण खिवनी अभ्यारण्य आज इको-टूरिज्म की नई पहचान बनकर उभर रहा है।