पानी के लिए कलेक्टर के दरबार पहुँचे आदिवासी ग्रामीण नल-जल योजना ज़मीन पर फेल, काग़ज़ों में चल रही
28 Jan 2026
रिपोर्टर-- रवि कुमरे
देवास।
कन्नौद जनपद की ग्राम पंचायत भिलाई में भीषण जल संकट से जूझ रहे आदिवासी ग्रामीणों का सब्र आखिर टूट गया। गांव के आदिवासी मोहल्लों के बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा करीब 120 किलोमीटर का सफर तय कर देवास कलेक्टर कार्यालय पहुँचे और जनसुनवाई में अपनी पीड़ा रखी।
ग्रामीणों ने कलेक्टर को बताया कि सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना (जल जीवन मिशन) काग़ज़ों में तो चालू है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में पूरी तरह फेल साबित हो रही है। पूरे गांव और आदिवासी मोहल्लों में एक बूंद पानी नहीं पहुंच रहा, जबकि पंचायत और विभागीय रिकॉर्ड में योजना को सफल बताया जा रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एसडीएम कन्नौद को शिकायत देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, उल्टा पंचायत के दबंग लोगों द्वारा पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई। दबंगों के दबाव में आदिवासी मोहल्लों को जानबूझकर पानी से वंचित रखा जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत सचिव पवन प्रजापति एवं पीएचई विभाग की इंजीनियर छाया दुबे द्वारा कुएं और ट्यूबवेल को सूखा घोषित कर पंचनामा तो बनाया गया, लेकिन इसके बाद न तो वैकल्पिक जल व्यवस्था की गई और न ही टैंकर भेजे गए।
जनसुनवाई में मौजूद महिलाओं ने बताया कि उन्हें कई किलोमीटर दूर से पानी ढोना पड़ रहा है, जिससे छोटे बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं।
ग्रामीणों ने यह भी खुलासा किया कि कन्नौद विकासखंड की गुड़बेल ग्राम पंचायत में नल-जल योजना की टंकी बने तीन साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन आज तक ग्रामीणों को पानी नहीं मिला। काग़ज़ों में टंकी को चालू दिखाकर हैंडओवर कर दिया गया, जबकि न तो मौके पर निरीक्षण हुआ और न ही जल आपूर्ति शुरू की गई।
जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से सुनते हुए जांच के निर्देश देने की बात कही। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि अब जल्द ही उन्हें जल संकट से राहत मिलेगी।
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