आदिवासी क्रांतिकारी शहीद चौक हरणगांव में टंट्या भील जयंती व 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया
27 Jan 2026

आदिवासी क्रांतिकारी शहीद चौक हरणगांव में टंट्या भील जयंती व 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया
हरणगांव। आदिवासी क्रांतिकारी शहीद चौक हरणगांव में आदिवासी जननायक टंट्या भील की जयंती एवं 77वां गणतंत्र दिवस श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महापुरुषों एवं संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर को माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन एवं आदिवासी जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए आकाश उइके ने बताया कि 26 जनवरी का दिन आदिवासी समाज और पूरे देश के लिए अत्यंत गौरवशाली है, क्योंकि इसी दिन भारतीय संविधान लागू हुआ और इसी दिन भारतीय रॉबिन हुड कहे जाने वाले जननायक टंट्या भील का जन्म हुआ था। उन्होंने कहा कि टंट्या भील 19वीं सदी के महान आदिवासी नेता एवं स्वतंत्रता सेनानी थे। वे भील समाज से थे और अंग्रेजों व जमींदारों से लूटा गया धन गरीबों, वंचितों और शोषितों में बांटते थे। उनका संघर्ष केवल राजनीतिक आज़ादी तक सीमित नहीं था, बल्कि सामाजिक न्याय, सम्मान और अधिकारों के लिए था। इतिहासकार जान हेंड्राप ने उन्हें “लिविंग गॉड” और “गॉड ऑफ जस्टिस ऑफ द वर्ल्ड” कहा है। आज भी टंट्या भील आदिवासी प्रतिरोध और जनसंघर्ष के प्रतीक हैं। कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि टंट्या भील और बिरसा मुंडा के अनुयायियों के समर्थन से बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर पश्चिम बंगाल से सांसद बने और उन्हें संविधान निर्माण का अवसर मिला। 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने के साथ भारत एक संप्रभु गणराज्य बना। यह दिन हमें याद दिलाता है कि आज़ादी केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं, बल्कि अपने नियमों, मूल्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुसार जीने का अधिकार है। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय गणतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह परिवर्तन किसी हिंसा से नहीं, बल्कि विचार, संवाद और संविधान के माध्यम से हुआ। 26 जनवरी हमें यह संदेश देता है कि इस देश में सत्ता का असली स्रोत जनता है—हम शासित नहीं, बल्कि सहभागी हैं। कार्यक्रम में निवारदी सरपंच सुभाष इवने, सतीश धुर्वे, रामानंद उइके, कैलाश बारवाल, पुरुषोत्तम शर्मा, हरिप्रसाद राठौर, उमाशंकर मंडलोई, कलूसिंह उइके, महेश धनवारे, अशोक मंडलोई, गोकुल मर्सकोले, गजेंद्र उइके, हरिओम गोयल, केवलराम बारवाल, रितेश परते, राहुल बारवाल, रामपाल धुर्वे, निलेश बारवाल, अमर धुर्वे, रवि बारवाल, राकेश बारवाल, आर्यन मंडलोई, दुर्गेश बारवाल, नीरज राठौर सहित आसपास क्षेत्र के बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में मोहन बारवाल ने उपस्थित सभी ग्रामीणजनों एवं क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया।