आदिवासी क्रांतिकारी शहीद चौक पर बाबासाहेब के 69वें महापरिनिर्वाण दिवस और टंट्या भील के 136वें शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित
06 Dec 2025

आदिवासी क्रांतिकारी शहीद चौक पर बाबासाहेब के 69वें महापरिनिर्वाण दिवस और टंट्या भील के 136वें शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित
हरणगाँव/खातेगाँव- आदिवासी क्रांतिकारी शहीद चौक हरण गाँव में आज बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के 69वें महापरिनिर्वाण दिवस और आदिवासी जननायक टंट्या भील के 136वें शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामवासी और सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभा को संबोधित करते हुए केवलराम बारवाल ने कहा कि “जहां सभी धर्मग्रंथ धर्म को सर्वोच्च बताते हैं, वहीं भारत का राष्ट्रीय ग्रंथ संविधान मानवता को सर्वोच्च धर्म बताता है। हमें बाबासाहेब के विचारों और टंट्या मामा की त्याग-बलिदान से प्रेरणा लेकर उनकी शिक्षाओं को आत्मसात करने की आवश्यकता है।” जानकारी देते हुए आकाश उईके ने कहा कि मध्यप्रदेश के जननायक टंट्या भील स्वतंत्रता आंदोलन के उन वीर सपूतों में शामिल थे, जिन्होंने अंग्रेजी शासन को लगातार चुनौती दी। उन्हें आदिवासियों का रॉबिनहुड भी कहा जाता है, क्योंकि वे अंग्रेजों द्वारा लूटी गई संपत्ति को गरीब और जरूरतमंद जनता में बांट देते थे। जन-जन में वे टंट्या मामा के नाम से लोकप्रिय हैं। इतिहास के अनुसार टंट्या मामा का जन्म सन् 1840 में खंडवा ज़िले की पंधाना तहसील के गांव बरदा में हुआ था। वर्ष 1878 से 1889 तक उन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ क्रांतिकारी गतिविधियाँ संचालित कीं। वर्ष 1889 में जबलपुर में उन पर मुकदमा चलाया गया और 4 दिसंबर 1889 को उन्हें फांसी दे दी गई। मातृभूमि के स्वातंत्र्य के लिए उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान दिया। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने दोनों महापुरुषों को नमन करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम में हरिओम गोयल, मोहन बारवाल, आनंद धुर्वे, विजेश मर्सकोले, निलेश बारवाल, नीरज राठौर, रवि वारवाल, अशोक मंडलोई, रोहित खत्री, बालकराम धनवारे, दुर्गेश बारवाल, रितेश परते, कैलाश बारवाल, उमाशंकर मंडलोई सहित अनेक ग्रामवासी उपस्थित रहे।