राष्ट्रीय गीत ‘बंदे मातरम’ 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक वर्ष तक चलने वाले स्मरणोत्सव का हुआ शुभारम्भ
08 Nov 2025
रिपोर्टर--मुकेश कुमार यादव
राष्ट्रीय गीत ‘बंदे मातरम’ 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक वर्ष तक चलने वाले स्मरणोत्सव का हुआ शुभारम्भ
‘बंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूर्ण होने पर मा0 प्रधानमंत्री व मा0 मुख्यमंत्री जी के कार्यक्रम का जनपद में हुआ सजीव प्रसारण
पूरे जनपद में सामूहिक वाचन में गूंजा ‘बंदे मातरम’-‘बंदे मातरम’
ब्रिटिश हूकुमत में देशवासियों को एकजुट करने एवं देश भक्ति की नई चेतना जगाने में ‘बंदे मातरम’ गीत ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका-विपुल दूबे
औपनिवेशिक शासन के प्रतिरोध में राष्ट्रीय चेतना की पहचान है ‘बंदे मातरम’ गीत-जिलाधिकारी
‘बंदे मातरम’ अर्थात भारत माता/मातृभूमि की बंदना-जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा
मातृभूमि को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक है राष्ट्रीय गीत-पुलिस अधीक्षक
‘बंदे मातरम’ के 150वें वर्ष के स्मरणार्थ सालभर पूरे जनपद में आयोजित होगें ‘बंदे मातरम’ आधारित विभिन्न गतिविधियॉ-सीडीओ
भदोही 07 नवम्बर, 2025ः- ’राष्ट्रवाद के अग्रदूत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय जी द्वारा वर्ष 1875 में रचित राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक वाचन एवं स्वदेशी का संकल्प कार्यक्रम विषयक मा0 प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में राष्ट्रीय कार्यक्रम एवं मां मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में राज्यस्तरीय संबोधन कार्यक्रम का सजीव प्रसारण कलेक्ट्रेट सभागार में मा0 विधायक ज्ञानपुर विपुल दूबे, मा0 जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा, जिलाधिकारी शैलेष कुमार, मुख्य विकास अधिकारी बाल गोबिन्द शुक्ल, पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक, अपर पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल के नेतृत्व में एसपी आफिस, पुलिस लाईन सभागार एवं समस्त थाना व चौकियों में पुलिस बैण्ड द्वारा बंदे मातरम ध्वनि का सामूहिक रूप से बंदे मातरम का गायन कर उसके ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक मंच को प्रचारित व प्रसारित किया गया। जनपद के विभिन्न बेसिक/माध्यमिक/डिग्री कालेजों में प्रभात फेरी/मार्च पास्ट/रैली, प्रार्थना सभा के दौरान सामूहिक गायन, सेमिनार संगोष्ठी, रंगोली, निबन्ध लेखन, काव्य पाठ, वाद्यय प्रतियोगिता का आयोजन कर बंदे मातरम राष्ट्रीय गीत का स्वाधीनता संग्राम में राष्ट्रीय चेतना के प्रेरक के रूप में विभिन्न आयामो पर बल दिया गया। सायं कालीन हरिहरनाथ मन्दिर स्थित, शहीद पार्क पर डीएम, एसपी, सीडीओ, एएसपी ने पुलिस बैण्ड की ध्वनि में बंदे मातरम का नगर वासियों के साथ सामूहिक गायन कर शहीदो को माल्यापर्ण कर नमन किया।
ब्रिटिश हूकुमत में देशवासियों को एकजुट करने एवं देश भक्ति की नई चेतना जगाने में ‘बंदे मातरम’ गीत ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका, यह बात बतो हुए विधायक ज्ञानपुर विपुल दूबे ने बंदे मातरम के महत्व से जनपदवासियों को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि स्वधीनता संग्राम की समरवेदी में इसी राष्ट्रगीत बंदे मातरम का गायन करते हुए देश की आजादी हेतु अपने प्राणों की आहूति दे दी। ‘बंदे मातरम’ अर्थात भारत माता/मातृभूमि की बंदना है। यह बतातु हुए जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा ने बताया कि संयासी विद्रोह की पृष्ठभूमि में 1875 में बंकिमचन्द्र चट्टर्जी ने यह गीत लिखा। 1882 में उनके प्रसिद्ध उपान्यास आनन्दमठ के एक स्वतंत्र भाग के रूप में बंग दर्शन साहित्यिक पत्रिका में वर्णित हुआ।
जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने बंदे मातरम 150 कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2025 में हमारे राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि श्री बंकिम चन्द्र चटर्जी द्वारा रचित ‘वंदे मातरम’ गीत अक्षय नवमी, जो वर्ष 1875 में 07 नवम्बर को थी, के शुभ अवसर पर लिखा गया था। ‘वंदे मातरम’ गीत पहली बार साहित्यिक पत्रिका ‘बंग दर्शन’ में उनके उपन्यास ‘आनन्दमठ’ के धारावाहिक प्रकाशन के एक भाग के रूप में प्रकाशित हुआ था, जिसका वर्ष 1882 में एक स्वतन्त्र पुस्तक के रूप में प्रकाशन हुआ। उस दौरान, भारत बड़े सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक परिवर्तनों से गुजर रहा था और राष्ट्रीय पहचान तथा औपनिवेशिक शासन के प्रतिरोध की चेतना बढ़ रही थी। स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान विभिन्न समुदायों, संस्कृतियों और देशवासियों को एकजुट करने एवं देशभक्ति की नई चेतना जगाने में इस गीत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मातृभूमि को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक मानते हुए इस गीत ने ‘भारत की एकता और स्वाभिमान’ की जागृत भावना को काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी तथा शीघ्र ही यह गीत राष्ट्र के प्रति समर्पण का एक स्थायी प्रतीक बन गया। यह गीत भारत की मातृभूमि के प्रति प्रेम और श्रद्धा का अनूठा उदाहरण तथा हमारे देश की संस्कृति की पहचान व उसकी विरासत का प्रतीक है। दिनांक 24 जनवरी, 1950 को श्भारतीय संविधान सभाश् द्वारा इसे ‘राष्ट्रीय गीत’ के रूप में अपनाया गया।
पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि स्वाधीनता संग्राम में ‘बंदे मातरम’ गीत की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए 150वें वर्ष के स्मरणार्थ राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। ‘बंदे मातरम’ गीत वर्ष 1875 में बंकिमचन्द्र चट्टोध्याय द्वारा रचा गया था। 1905 में बंगाल के विभाजन तक आते आते, यह गीत एक प्रेरणात्मक गीत मार्चिग गीत के रूप में लोकप्रिय हो गयी थी। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद ने वर्ष 1950 में ‘बंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्रदान किया। देशभर में विभाजन के विरोध में हुए आंदोलनो के दौरान ‘बंदे मातरम’ राष्ट्रवाद, एकता और ब्रिटिश शासन के विरूद्ध प्रतिरोध का सशक्त प्रतीक बन गया।
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए सीडीओ बाल गोबिन्द शुक्ल ने राष्ट्रीय कार्यकम ‘बंदे मातरम’ 150 के क्रियान्वयन पर बल देते हुए बताया कि पूरे देश में दिनांक 7 नवम्बर, 2025 से दिनांक 7 नवम्बर, 2026 तक चार चरणों में ‘बंदे मातरम’ गीत के 150 वर्ष के अवसर को भव्यता पूर्ण ढंग से मनाए जाने का निर्णय लिया गया है। यह चरण निम्नानुसार हैं - प्रथम चरण (शुभारम्भ सप्ताह) दिनांक 07 से 14 नवम्बर, 2025 तक। द्वितीय चरण (गणतंत्र दिवस के कार्यक्रमों के साथ) दिनांक 19 से 26 जनवरी, 2026 तक। तृतीय चरण (हर घर तिरंगा 2026 के साथ) दिनांक 07 से 15 अगस्त, 2026 तक। चतुर्थ चरण (समापन सप्ताह) दिनांक 01 से 07 नवम्बर, 2026 तक। ‘वंदे मातरम्’ गीत के 150 वर्ष के अवसर पर दिनांक 7 नवम्बर, 2025 को सम्पादित की जाने वाली गतिविधियों का विवरण निम्नवत है-
कलेक्टेªट, विकास भवन, एसपी आफिस, पुलिस लाईन, समस्त शासकीय/अशासकीय कार्यालयों मे सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया गया, तथा उसके ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व को प्रचारित-प्रसारित किया गया।
जनपद के समस्त स्कूलों/विद्यालयों में सामूहिक रूप से प्रातः 10 बजे ‘बंदे मातरम’ का गायन किया गया तथा उसके ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व से विद्यार्थियों को अवगत कराया गया।
इस आयोजन का सूचना विभाग के माध्यम से प्रचार-प्रसार एवं लाइव प्रसारण कराया गया। उच्च शिक्षा संस्थानों में वंदे मातरम् के राष्ट्रीय एकता एवं स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को लेकर विशेष रूप से सेमिनार, संगोष्ठी, परिचर्चा एवं लैक्चर आदि का आयोजन किया गया, जिसमें युवाओं की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गया।
जिला मुख्यालय ज्ञानपुर में हरिहरनाथ मन्दिर स्थित शहीद पार्क विभिन्न स्वतंत्रता संग्राम शहीद स्थलों/स्मारकों एवं अन्य युद्धों में शहीद हुए शहीदों के नाम से बनाए गए ‘स्मारकों’ पर जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग द्वारा ‘वंदे मातरम् गीत के 150 वर्ष’ के अवसर पर वंदे मातरम् ध्वनि का वादन पी०ए०सी०, पुलिस, स्काउट गाइड आदि के बैण्ड द्वारा किया गया। बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभागों द्वारा सभी सरकारी एवं गैर सरकारी विद्यालयों में इस अवसर पर प्रार्थना सभा के दौरान वंदे मातरम् का सामूहिक गायन कराया गया। साथ ही विद्यार्थियों को ‘वंदे मातरम’ गीत का इतिहास, अर्थ एवं इसके संदेश की विस्तृत व्याख्या की गयी। बेसिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में वंदे मातरम् थीम पर आधारित ‘देश-भक्ति’ की फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। स्कूलों में रैली/प्रभात फेरी/मार्च पास्ट के आयोजन सुनिश्चित किए गया एवं इन आयोजनों में ‘वंदे मातरम’ के गान की धुन बजाई गई तथा इसका संदेश जन-जन तक पहुँचाया गया। इस अवसर पर विभिन्न विद्यालयों में देशभक्ति पर आधारित रंगोली, प्रतियोगिताएं, निबन्ध लेखन प्रतियोगिताएं, काव्य पाठ प्रतियोगिताएं, वाद-विवाद प्रतियोगिताएं एवं भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
‘वंदे मातरम’ की थीम पर कला एवं संस्कृति को प्रदर्शित करते हुए विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन सुनिश्चित किया गया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से वंदे मातरम् के प्रति श्रद्धाभाव समर्पित करते हुए जन-जन तक इसकी आभा को पहुँचाया गया।
जनपदीय कार्यक्रम में पूर्व जिलाध्यक्ष संतोष पाण्डेय, किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष चन्द्रशेखर, ज्ञानपुर चेयरमैन घनश्यामदास गुप्ता, अपर जिलाधिकारी कुंवर वीरेन्द्र मौर्य, जिला सूचना अधिकारी डॉ0 पंकज कुमार, डीडीओ ज्ञानप्रकाश, डीसी मनरेगा राजाराम, उपायुक्त उद्योग अधिकारी आशुतोष सहाय पाठक, डीसी एनआरएलएम अनुराग राय, अधिशासी अधिकारी धनराज सिंह सहित अन्य अधिकारी/कर्मचारी, पुलिस बल के जवान, छात्र/छात्रा, जनपदवासी








