प्राचीन संस्कृति की अनुपम छटा बिखेरता बारह खंभा मेला
23 Oct 2025
रिपोर्टर-- रवि कुमरे
सीहोर। दीपावली के दूसरे दिन पड़वा के अवसर पर इछावर तहसील के ग्राम देवपुरा (बारह खंभा) में आयोजित होने वाला बारह खंभा मेला इस क्षेत्र की प्राचीन परंपराओं और आस्था का प्रतीक है। यह मेला पशुधन के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए की जाने वाली पूजा-अर्चना की अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।
सीहोर जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर लगने वाला यह मेला मध्य क्षेत्र का सबसे बड़ा पारंपरिक मेला माना जाता है। हर वर्ष यहाँ लाखों श्रद्धालु और जनजातीय समाज के लोग अपने दुधारू पशुओं के दूध से “देवशिला” का अभिषेक करते हैं। मान्यता है कि देवशिला पर दूध अर्पित करने से पशुधन पूरे वर्ष रोगमुक्त रहता है।
सुबह से शाम तक हजारों लीटर दूध से अभिषेक की यह परंपरा जनजातीय आस्था और संस्कृति का जीवंत स्वरूप प्रस्तुत करती है। बारह खंभा मेले में प्रदेश के विभिन्न जिलों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। अनुमानित दो लाख से अधिक लोगों की उपस्थिति के कारण यह मेला सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह मेला प्राचीन काल से आयोजित किया जा रहा है। बताया जाता है कि देवपुरा गाँव में बारह पत्थर के स्तंभों के नीचे स्थित देवशिला को “बारह खंभा वाले देव महाराज” के नाम से पूजा जाता है। इन्हीं स्तंभों के कारण इस स्थान का नाम बारह खंभा पड़ा।
एक किवदंती के अनुसार, एक किसान को जब लगातार अपने पशुओं की मृत्यु का सामना करना पड़ा, तब एक ग्वाले ने उसे बताया कि बारह खंभों के बीच स्थित देवशिला पर पड़वा के दिन दूध चढ़ाने से पशुधन रोगमुक्त रहेगा। तभी से यहाँ दूध चढ़ाने की परंपरा प्रारंभ हुई, जो आज भी जन-जन की आस्था का केंद्र बनी हुई है।








