कर्मचारी तड़पता रहा और मालिक सिर्फ मोबाइल में झांकता रहा मानवता को कर दिया शर्मसार
10 Oct 2025

कर्मचारी तड़पता रहा और मालिक सिर्फ मोबाइल में झांकता रहा मानवता को कर दिया शर्मसार
कर्मचारी तड़पता रहा और मालिक सिर्फ मोबाइल में झांकता रहा मानवता को कर दिया शर्मसार हर खबर आपके साथ सुसनेर से रामचन्द्र टेलर आगर मालवा। मानवता को शर्मसार करने वाली एक दिल दहला देने वाली घटना सुसनेर क्षेत्र से सामने आई है। वायरल हो चुके एक वीडियो में न केवल एक कर्मचारी की ज़िंदगी से खिलवाड़ होता दिखा, बल्कि कार्यस्थलों पर ज़िम्मेदारी और संवेदनशीलता के नाम पर एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है। 6 मिनट लंबे इस वीडियो में एक कर्मचारी की तबीयत अचानक बिगड़ती है। वह रोज़ की तरह काम में जुटा हुआ था, तभी वह अचानक अपनी कुर्सी पर बैठ जाता है। कुछ ही पलों में उसके शरीर में बेचैनी और मरोड़ शुरू हो जाती है। वह बार-बार अपने हाथ-पैर मारता है, कुर्सी पर तड़पता है और साफ़ झलकता है कि उसे तत्काल चिकित्सा सहायता की सख्त ज़रूरत है। पास मौजूद अन्य कर्मचारी और साथी इंसानियत दिखाते हैं – वे तुरंत उसके पास पहुँचते हैं, पानी पिलाते हैं, उसे संभालने की कोशिश करते हैं। लेकिन इसी बीच सबसे चौंकाने वाली तस्वीर कैमरे में कैदहोती है। पास ही कुर्सी पर आराम से बैठा उसका मालिक न तो अपनी जगह से उठता है, न कोई प्राथमिक चिकित्सा की कोशिश करता है और न ही एम्बुलेंस बुलाने का प्रयास। वह व्यक्ति मोबाइल चलाते हुए पूरी घटना को तमाशे की तरह देखता रहता है। पूरे छह मिनट तक पीड़ित कर्मचारी तड़पता रहा। न उसे स्ट्रेचर मिला, न कोई वाहन, न कोई मेडिकल टीम। इस दौरान मालिक की यह बेरुखी और संवेदनहीनता देख आसपास के लोग भी स्तब्ध रह गए। वीडियो में स्पष्ट दिखता है कि अगर समय पर सही कदम उठाया जाता, तो स्थिति को संभाला जा सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ – और यही लापरवाही आज पूरे इलाके में गुस्से का कारण बन गई है। प्रशासन और कानून पर बड़े सवाल यह घटना सिर्फ एक संवेदनहीन मालिक की नहीं, बल्कि कार्यस्थलों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल भी खोलती है। श्रम काननों और औद्योगिक नियमों के अनुसार हर कार्यस्थल पर प्राथमिक चिकित्सा सुविधा, फर्स्ट एड किट और आपातकालीन सहायता की व्यवस्था अनिवार्य है। लेकिन इस वीडियो में साफ दिखता है कि न तो कोई मेडिकल सुविधा थी, न ही प्रशिक्षित व्यक्ति जो इस स्थिति को संभाल सके। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही धारा BNS 106 (लापरवाही से मृत्यु) और अन्य प्रावधानों के तहत गंभीर अपराध मानी जा सकती है। यदि जांच में यह साबित हो जाए कि मालिक ने मदद न देकर लापरवाही की, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई संभव है। लोगों में गुस्सा - "मानवता मर गई क्या?" यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो चुका है। आम नागरिकों से लेकर सामाजिक संगठनों तक, हर कोई इस घटना पर गुस्सा जाहिर कर रहा है। कई लोगों ने लिखा - "कर्मचारी तड़पता रहा और मालिक सिर्फ मोबाइल में झांकता रहा - इससे बड़ी शर्म की बात और क्या हो सकती है?" Each समय पर अस्पताल पहुंचा दिया जाता, तो शायद जान बच सकती थी।" स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस घटना की तत्काल जांच की जाए, और मालिक की जिम्मेदारी तय कर उसे दंडित किया जाए। साथ ही सभी उद्योगों और निजी संस्थानों में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था अनिवार्य करने की सख्त मांग भी की जा रही है। यह घटना एक चेतावनी है यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति या एक मालिक की गलती नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है जिसमें मानवता, ज़िम्मेदारी और त्वरित सहायता अक्सर नज़रअंदाज़ कर दी जाती है। कार्यस्थलों पर ऐसे हादसे किसी के भी साथ हो सकते हैं। इसलिए प्रशासन, उद्योग और समाज तीनों इस पर गंभीरता से कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में किसी की जान लापरवाही की वजह से न जाए।