देवास के जामगोद में अधूरी पुलिया बनी खतरा, रस्सी पकड़कर जान जोखिम में पार कर रहे ग्रामीण
22 Sep 2025

देवास। जिले के जामगोद गांव में अधूरी पड़ी पुलिया इन दिनों ग्रामीणों के लिए जान का संकट बनी हुई है। आधे-अधूरे निर्माण के चलते लोग रोज़ाना अपनी और परिवार की ज़िंदगी दांव पर लगाकर इस पुलिया को पार करने को मजबूर हैं। हालात इतने खराब हैं कि लोगों ने खुद ही रस्सी बांधकर उसे सहारा बनाया है और उसी को पकड़कर ग्रामीण पुलिया पार करते हैं। गांव के लोगों का कहना है कि यह पुलिया दो गांवों को जोड़ती है और आसपास के कई खेतों, स्कूलों और बाज़ार तक पहुँचने का यही एकमात्र रास्ता है। बरसात के मौसम में जब पानी का बहाव तेज़ हो जाता है, तब यह पुलिया और भी खतरनाक रूप ले लेती है। महिलाओं और बच्चों को पार कराने के लिए पुरुष पहले खुद जाते हैं और फिर रस्सी पकड़कर एक-एक कर उन्हें पार कराते हैं। स्थानीय निवासियों ने बताया कि इस अधूरी पुलिया को बनने की शुरुआत करीब डेढ़ साल पहले हुई थी। शुरुआती काम के बाद से ही निर्माण पूरी तरह ठप है। कई बार अधिकारियों को शिकायतें की गईं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। गांववालों का कहना है कि नेताओं और अधिकारियों ने पुलिया का निरीक्षण तो किया, मगर काम आगे नहीं बढ़ा।
देवास के जामगोद में अधूरी पुलिया बनी खतरा, रस्सी पकड़कर जान जोखिम में पार कर रहे ग्रामीण
इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। स्कूली बच्चों को रोज़ाना पढ़ाई के लिए इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। बारिश के दिनों में कई बार बच्चे फिसलकर गिर भी जाते हैं, जिससे माता-पिता लगातार चिंता में रहते हैं। बुजुर्गों और बीमार लोगों को इलाज के लिए गांव से बाहर ले जाना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस पुलिया के अधूरेपन से कई बार हादसे हो चुके हैं। जानवर बह गए, लोग घायल हुए, लेकिन कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द पुलिया का निर्माण कार्य पूरा कराया जाए, ताकि लोगों को इस जोखिम भरे रास्ते से निजात मिल सके। अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों का गुस्सा इस बात पर भी है कि सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।