सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर मोहम्मद रफीक़ अंसारी ने किया पूर्वजों को नमन
21 Sep 2025

सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर मोहम्मद रफीक़ अंसारी ने किया पूर्वजों को नमन
कटिहार, संवाददाता। हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास में पड़ने वाली अमावस्या को सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या कहा जाता है। यह तिथि श्राद्ध पक्ष का अंतिम दिन होती है और इस दिन सभी पितरों को स्मरण कर तर्पण, पिंडदान और श्रद्धांजलि दी जाती है। मान्यता है कि इस दिन किया गया तर्पण और दान सभी पूर्वजों को मोक्ष प्रदान करता है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। इसी अवसर पर मंडल कार्य समिति सदस्य (कोढ़ा 69) अनुसूचित जाति मुख्यालय, कोढ़ा कटिहार मोहम्मद रफीक़ अंसारी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि – “श्राद्ध पक्ष में सभी पूर्वजों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए हम उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हैं। उनका आशीर्वाद ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और हम सब पर ऐसे ही बना रहे।” उन्होंने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति की यह अनूठी परंपरा हमें यह सिखाती है कि पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। जिस समाज में अपने बड़ों और पूर्वजों का आदर होता है, वहाँ संस्कार और नैतिकता की जड़ें सदैव मजबूत रहती हैं। अंसारी ने लोगों से अपील की कि इस अवसर पर हर कोई अपने पूर्वजों को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित करे और परिवार में एकता, प्रेम और सहयोग की परंपरा को आगे बढ़ाए।
सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर मोहम्मद रफीक़ अंसारी ने किया पूर्वजों को नमन
राष्ट्रीय चाय दिवस पर मोहम्मद रफीक़ अंसारी का संदेश – “चाय जीवन का सुकून और अपनापन है”
कटिहार, संवाददाता। भारत में चाय केवल एक पेय नहीं बल्कि संस्कृति का हिस्सा है। सुबह की ताजगी से लेकर दिनभर की थकान मिटाने तक चाय हर किसी के जीवन से जुड़ी हुई है। इसीलिए देशभर में राष्ट्रीय चाय दिवस मनाया जाता है ताकि इस पेय की महत्ता और इससे जुड़े लाखों किसानों व कामगारों के योगदान को याद किया जा सके। इस अवसर पर मोहम्मद रफीक़ अंसारी ने जिलेवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि – “जो वक़्त के साथ बदल जाए, वो राय होती है। जब ज़िंदगी में कुछ नहीं होता, तब बस चाय होती है।” उन्होंने कहा कि चाय हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। चाहे परिवार के साथ बैठकी हो, मित्रों का मिलन हो या कार्यस्थल पर थोड़ी राहत की घड़ी – हर जगह चाय हमारी भावनाओं को जोड़ने का काम करती है। उन्होंने यह भी कहा कि चाय उत्पादन में लगे किसान और मज़दूर हमारे लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनके कठिन परिश्रम के कारण ही भारत आज विश्व के बड़े चाय उत्पादक देशों में शुमार है। राष्ट्रीय चाय दिवस का उद्देश्य इन्हीं किसानों को सम्मान देना और चाय की सामाजिक-सांस्कृतिक महत्ता को याद करना है। अंत में अंसारी ने सभी को राष्ट्रीय चाय दिवस की शुभकामनाएँ दीं और कहा कि – “चाय सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि जीवन में सुकून और अपनापन देने वाली ताक़त है। हमें अपने किसानों के परिश्रम का आदर करते हुए चाय को सिर्फ पेय नहीं बल्कि संबंधों को जोड़ने वाला माध्यम समझना चाहिए।”