संदलपुर में हाइवे जाम : प्रशासन की लापरवाही से आस्था बनी अव्यवस्था
21 Sep 2025

संदलपुर में हाइवे जाम : प्रशासन की लापरवाही से आस्था बनी अव्यवस्था
संदलपुर/नेमावर। सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर नर्मदा तट नेमावर में आस्था का महासैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। लाखों लोग पितृ तर्पण और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुँचे। लेकिन श्रद्धा का यह विशाल आयोजन एक बार फिर प्रशासनिक अव्यवस्था की भेंट चढ़ गया और श्रद्धालुओं को घंटों तक परेशानियों का सामना करना पड़ा। 3 किलोमीटर लंबा जाम, श्रद्धालु बेहाल- रविवार सुबह से ही संदलपुर–नेमावर हाईवे पर वाहनों का दबाव बढ़ना शुरू हो गया था। दोपहर तक हालात बिगड़ गए और करीब 3 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। बच्चे, महिलाएँ और बुजुर्ग तपती धूप में घंटों तक फंसे रहे। कई श्रद्धालु पैदल ही लंबा रास्ता तय करने को मजबूर हो गए। श्रद्धालुओं ने बताया कि हर साल यही स्थिति बनती है, लेकिन प्रशासन कभी सबक नहीं लेता। शांति समिति की बैठकें—सिर्फ कागजों तक- अमावस्या पूर्व प्रशासन ने शांति समिति की बैठकों में ट्रैफिक डायवर्जन, वैकल्पिक मार्ग और सुरक्षा इंतज़ामों के दावे किए थे। लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके विपरीत रही। हाईवे पर पर्याप्त पुलिस बल नजर नहीं आया। न तो डायवर्जन का पालन हुआ और न ही जाम तोड़ने की कोई ठोस रणनीति अपनाई गई। श्रद्धालु बोले—“प्रशासन सिर्फ बैठकें करता है, व्यवस्थाएँ वहीं
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रह जाती हैं।” अधूरे नेशनल हाईवे पर टोल वसूली का सवाल यात्रियों ने यह भी सवाल उठाया कि जब इंदौर–बैतूल नेशनल हाईवे कई जगह अधूरा है, तो टोल टैक्स क्यों वसूला जा रहा है? अधूरी सड़क और खराब व्यवस्थाओं के चलते श्रद्धालुओं को कई घंटे तक जाम में फंसा रहना पड़ा। कई वाहन चालकों ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि सड़क निर्माण अधूरा होने से स्थिति और अधिक बिगड़ रही है। आस्था बनाम अव्यवस्था—कब तक? हर साल अमावस्या पर लाखों श्रद्धालु नेमावर पहुँचते हैं। यह आस्था का सबसे बड़ा आयोजन है, भीड़ का दबाव पहले से अनुमानित रहता है। इसके बावजूद प्रशासनिक इंतज़ाम हर बार नाकाम साबित होते हैं। अब बड़ा सवाल यही है— क्या प्रशासन सिर्फ कागज़ी योजनाओं और बैठकों तक सीमित रहेगा? श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा कब प्राथमिकता बनेगी? और क्या आस्था का यह महापर्व हर साल अव्यवस्था का प्रतीक बनकर रह जाएगा?