हाथों के बल माँ नर्मदा की परिक्रमा कर रहे धर्मपुरी महाराज
04 Jan 2026

हाथों के बल माँ नर्मदा की परिक्रमा कर रहे धर्मपुरी महाराज
अद्भुत तपस्या बनी श्रद्धा और आस्था का केंद्र डिंडोरी। हर-हर नर्मदे… हर-हर महादेव… माँ नर्मदा के प्रति भक्तों की आस्था और भक्ति का स्वरूप सदियों से विविध रूपों में देखने को मिलता रहा है। कोई पैदल परिक्रमा करता है, कोई दंडवत होकर तो कोई लुढ़कते हुए माँ नर्मदा की कठिन परिक्रमा पूरी करता है। किंतु निरंजनी अखाड़ा से जुड़े संत श्री धर्मपुरी महाराज ने भक्ति और तपस्या की एक ऐसी अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की है, जिसने साधु-संतों से लेकर आम जनमानस तक को आश्चर्य और श्रद्धा से भर दिया है। संत श्री धर्मपुरी महाराज ने हाथों के बल माँ नर्मदा की परिक्रमा करने का कठिन और असाधारण संकल्प लिया है। यह परिक्रमा न केवल शारीरिक क्षमता की परीक्षा है, बल्कि गहन तपस्या, धैर्य और समर्पण का प्रतीक भी है। दशहरा से अमरकंटक से शुरू हुई यात्रा महाराज जी ने दशहरा पर्व के पावन अवसर पर माँ नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक से इस कठिन परिक्रमा की शुरुआत की। वे प्रतिदिन हाथों के बल चलकर लगभग 3 से 4 किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं। इस प्रकार वे लगभग 3500 किलोमीटर की सम्पूर्ण नर्मदा परिक्रमा हाथों के बल पूरी करेंगे। डिंडोरी नगर में भव्य स्वागत जनवरी 2026 में संत श्री धर्मपुरी महाराज की यह कठिन यात्रा माँ नर्मदा नगरी डिंडोरी पहुँची। नगर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा, ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ महाराज जी का भव्य स्वागत किया। पूरे नगर में हर-हर नर्मदे के जयघोष गूंज उठे। हजारों श्रद्धालु सड़कों पर उतर आए और महाराज जी के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। कलेक्टर ने किया दर्शन-पूजन डिंडोरी कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने भी नगर के प्रसिद्ध नर्मदा तट डेम घाट पहुँचकर संत श्री धर्मपुरी महाराज के दर्शन-पूजन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। तपस्या बनी प्रेरणा स्थानीय नागरिकों का कहना है कि संत श्री धर्मपुरी महाराज की तपस्या को देखकर मन में भक्ति, आस्था और आत्मिक ऊर्जा का संचार होता है। यह परिक्रमा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि मानव जीवन में त्याग, धैर्य और विश्वास की अद्भुत मिसाल है। संत श्री धर्मपुरी महाराज की यह 3500 किलोमीटर लंबी हाथों के बल की परिक्रमा आज पूरे क्षेत्र में आस्था और प्रेरणा का केंद्र बन चुकी है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी भक्ति और तपस्या का अनुपम उदाहरण रहेगी।