श्री राम कथा का तृतीय दिवस: सती प्रसंग एवं दक्ष यज्ञ
13 Dec 2025

श्री राम कथा का तृतीय दिवस: सती प्रसंग एवं दक्ष यज्ञ
बरुआसागर, झांसी। नगर के मध्य स्थित श्री राम वाटिका (भाऊ जी के मंदिर) में चल रही संगीतमय श्री राम कथा के द्वितीय वर्ष के तृतीय दिवस पर पूज्य पंडित विनोद चतुर्वेदी जी महाराज (झांसी वाले) ने श्री सती जी के प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। महाराज श्री ने कहा कि कथा श्रवण करना भाग्य की बात है। जिसका भाग्य सोया हुआ होता है, उसका मन कथा में नहीं लगता। उन्होंने त्रेता युग का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब भगवान शिव अपनी अर्धांगिनी श्री सती जी के साथ अगस्त ऋषि के आश्रम में राम कथा सुनने गए, तब सती जी का मन कथा में नहीं लगा और उन्होंने कथा सुनी ही नहीं। कथा श्रवण न करने का परिणाम यह हुआ कि सती जी को दुखी होना पड़ा। उन्होंने शिव के मना करने पर भी वनवासी वेश में लीला कर रहे श्री राम को भगवान मानने से इनकार कर दिया और स्वयं परीक्षा लेने गईं। उन्होंने माता सीता का रूप धारण किया, लेकिन भगवान श्री राम उन्हें पहचान गए और 'ये सीता नहीं, मां सती हैं' कहकर उन्हें प्रणाम किया। इससे सती का संशय दूर हुआ। शर्मिंदा होकर जब सती जी वापस कैलाश आईं, तो शिव जी ने पूछा, "परीक्षा ले ली मेरे प्रभु की?" भय के कारण सती ने झूठ बोला। भगवान शिव ने ध्यान में बैठकर सत्य जाना और उदास होकर मन ही मन सती का परित्याग कर दिया। इसके बाद वे 87,000 वर्ष की समाधि में लीन हो गए। पंडित जी ने कहा, "भगवान की परीक्षा नहीं, प्रतीक्षा होनी चाहिए।" समाधि से जागने के बाद सती के पिता दक्ष को जब प्रजापतियों के स्वामी का पद मिला, तो उन्हें मद (अहंकार) आ गया। उन्होंने शिव का अपमान करते हुए एक यज्ञ कराया और शिव को निमंत्रण नहीं भेजा। सती के आग्रह पर शिव ने उन्हें यज्ञ में भेजा। यज्ञ में पति का अपमान देखकर सती क्रोधित हो गईं और अपने शरीर में योगाग्नि प्रकट करके देह भस्म कर दी। नारद जी द्वारा यह समाचार मिलने पर शिवजी ने वीरभद्र को भेजकर सभी को दंडित किया, बाद में विष्णु जी के कहने पर दक्ष को बकरे का सिर जोड़कर जिंदा किया गया। पंडित जी ने संदेश दिया कि यज्ञ बदले की भावना से नहीं, सर्व कल्याण की कामना से करना चाहिए। कथा के पूर्व श्रीमती राधिका अतुल सोनी ने पूजन किया। पूजन में पिंकी राय, धीरेंद्र राय, कृष्ण गोपाल हुण्डैत, श्रीमती गीता, श्रीमती रजनी सचिन चौरसिया, श्रीमती मीरा प्रमोद अलीजा, श्रीमती पूजा सौरभ पाठक, श्रीमती मोनिका प्रशांत अग्रवाल आदि गणमान्य भक्तजन उपस्थित रहे।
श्री राम कथा का तृतीय दिवस: सती प्रसंग एवं दक्ष यज्ञ
बरुआसागर, झांसी। नगर के मध्य स्थित श्री राम वाटिका (भाऊ जी के मंदिर) में चल रही संगीतमय श्री राम कथा के द्वितीय वर्ष के तृतीय दिवस पर पूज्य पंडित विनोद चतुर्वेदी जी महाराज (झांसी वाले) ने श्री सती जी के प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। महाराज श्री ने कहा कि कथा श्रवण करना भाग्य की बात है। जिसका भाग्य सोया हुआ होता है, उसका मन कथा में नहीं लगता। उन्होंने त्रेता युग का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब भगवान शिव अपनी अर्धांगिनी श्री सती जी के साथ अगस्त ऋषि के आश्रम में राम कथा सुनने गए, तब सती जी का मन कथा में नहीं लगा और उन्होंने कथा सुनी ही नहीं। कथा श्रवण न करने का परिणाम यह हुआ कि सती जी को दुखी होना पड़ा। उन्होंने शिव के मना करने पर भी वनवासी वेश में लीला कर रहे श्री राम को भगवान मानने से इनकार कर दिया और स्वयं परीक्षा लेने गईं। उन्होंने माता सीता का रूप धारण किया, लेकिन भगवान श्री राम उन्हें पहचान गए और 'ये सीता नहीं, मां सती हैं' कहकर उन्हें प्रणाम किया। इससे सती का संशय दूर हुआ। शर्मिंदा होकर जब सती जी वापस कैलाश आईं, तो शिव जी ने पूछा, "परीक्षा ले ली मेरे प्रभु की?" भय के कारण सती ने झूठ बोला। भगवान शिव ने ध्यान में बैठकर सत्य जाना और उदास होकर मन ही मन सती का परित्याग कर दिया। इसके बाद वे 87,000 वर्ष की समाधि में लीन हो गए। पंडित जी ने कहा, "भगवान की परीक्षा नहीं, प्रतीक्षा होनी चाहिए।" समाधि से जागने के बाद सती के पिता दक्ष को जब प्रजापतियों के स्वामी का पद मिला, तो उन्हें मद (अहंकार) आ गया। उन्होंने शिव का अपमान करते हुए एक यज्ञ कराया और शिव को निमंत्रण नहीं भेजा। सती के आग्रह पर शिव ने उन्हें यज्ञ में भेजा। यज्ञ में पति का अपमान देखकर सती क्रोधित हो गईं और अपने शरीर में योगाग्नि प्रकट करके देह भस्म कर दी। नारद जी द्वारा यह समाचार मिलने पर शिवजी ने वीरभद्र को भेजकर सभी को दंडित किया, बाद में विष्णु जी के कहने पर दक्ष को बकरे का सिर जोड़कर जिंदा किया गया। पंडित जी ने संदेश दिया कि यज्ञ बदले की भावना से नहीं, सर्व कल्याण की कामना से करना चाहिए। कथा के पूर्व श्रीमती राधिका अतुल सोनी ने पूजन किया। पूजन में पिंकी राय, धीरेंद्र राय, कृष्ण गोपाल हुण्डैत, श्रीमती गीता, श्रीमती रजनी सचिन चौरसिया, श्रीमती मीरा प्रमोद अलीजा, श्रीमती पूजा सौरभ पाठक, श्रीमती मोनिका प्रशांत अग्रवाल आदि गणमान्य भक्तजन उपस्थित रहे।