पंचायत सचिवों पर सरकार का बड़ा फैसला: अब गृहग्राम और ससुराल में नहीं कर सकेंगे पदस्थापना
11 Jun 2026

पंचायत सचिवों पर सरकार का बड़ा फैसला: अब गृहग्राम और

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने पंचायत सचिवों के स्थानांतरण को लेकर बड़ी और महत्वपूर्ण नई नीति लागू की है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी नई गाइडलाइन के अनुसार अब कोई भी पंचायत सचिव अपने गृहग्राम या ससुराल की ग्राम पंचायत में पदस्थ नहीं रह सकेगा। सरकार का उद्देश्य पंचायत प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाना, निष्पक्षता सुनिश्चित करना और रिश्तेदारी आधारित प्रभाव को समाप्त करना बताया गया है। नई व्यवस्था के तहत यदि किसी ग्राम पंचायत में सचिव का निकट संबंधी सरपंच या उपसरपंच निर्वाचित होता है, तो संबंधित सचिव को तत्काल वहां से हटाकर दूसरी पंचायत में पदस्थ किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे हितों के टकराव और पक्षपात की संभावनाएं कम होंगी तथा पंचायतों में निष्पक्ष कार्यप्रणाली को बढ़ावा मिलेगा। सरकार ने लंबे समय से एक ही पंचायत में जमे सचिवों पर भी सख्ती दिखाई है। नई नीति के अनुसार जो पंचायत सचिव 10 वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही पंचायत में कार्यरत हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर सबसे अधिक समय से पदस्थ सचिवों को पहले हटाया जाएगा। विभाग के अनुसार पूर्व में पंचायतों में वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं, मिलीभगत और पक्षपात संबंधी कई शिकायतें सामने आई थीं। इन्हीं अनुभवों और शिकायतों को ध्यान में रखते हुए तबादला नीति में व्यापक बदलाव किए गए हैं। नई गाइडलाइन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भ्रष्टाचार, वित्तीय गड़बड़ी, गंभीर शिकायत, अनुशासनहीनता, लोकायुक्त या आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच जैसे मामलों में तबादला प्रतिबंध अवधि के दौरान भी पंचायत सचिवों का स्थानांतरण किया जा सकेगा। हालांकि इसके लिए विभागीय मंत्री की स्वीकृति आवश्यक होगी। सरकार ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समयसीमा के भीतर नई नीति के अनुसार स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी कर पंचायत प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितैषी बनाया जाए।

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