इंदौर में हजारों लोगों का ऐतिहासिक पैदल मार्च, राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन
24 Dec 2025
रिपोर्टर-- रवि कुमरे
इंदौर।
अरावली पर्वत श्रृंखला को बचाने और देश के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में हो रही अंधाधुंध जंगल कटाई व खनन के विरोध में आज इंदौर में सर्व समाज के नेतृत्व में ऐतिहासिक पैदल मार्च निकाला गया। यह मार्च टंट्या भील चौराहा से कलेक्ट्रेट तक पहुंचा, जहां राष्ट्रपति महोदया के नाम से संवैधानिक ज्ञापन सौंपा गया।
इस विशाल मार्च में आदिवासी, दलित, ओबीसी, किसान, युवा, महिलाएं और पर्यावरण प्रेमी नागरिकों सहित हजारों लोग शामिल हुए। पूरे मार्ग में “अरावली बचाओ, भविष्य बचाओ” के नारों से शहर गूंजता रहा।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि अरावली पर्वतमाला में सभी प्रकार के खनन पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, अरावली को संरक्षित पारिस्थितिक क्षेत्र घोषित किया जाए तथा जंगल कटाई व अवैध खनन के दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
आयोजकों ने बताया कि यह आंदोलन केवल अरावली तक सीमित नहीं है, बल्कि सिंगरौली (मध्य प्रदेश), हसदेव अरण्य और बस्तर (छत्तीसगढ़) तथा तेलंगाना के वन क्षेत्रों में हो रही जंगल कटाई, खनन और भूमि डायवर्जन के खिलाफ एक राष्ट्रीय चेतावनी है। इन सभी क्षेत्रों में ग्राम सभा की स्वतंत्र, पूर्व एवं सूचित सहमति के बिना खनन को अवैधानिक बताते हुए संविधान की पाँचवीं अनुसूची, वन अधिकार अधिनियम 2006 और पेसा अधिनियम के पालन की मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि पर्यावरण विनाश और संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी नहीं रुकी, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।








